बर्डवॉचिंग का वंडरलैंड: गर्मियों में प्रवासी पक्षियों से गुलज़ार हो रहा मध्य प्रदेश*

News Jantantra

सतना -मध्य प्रदेश का नाम आते ही घने जंगल और दहाड़ते बाघों की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टाइगर स्टेट की इन सरहदों के भीतर एक और रंगीन दुनिया बसती है? नीला आसमां और पत्तों की सरसराहट के बीच रंग,पंख,उड़ान और चहचहाहट, जो लोगों के लिए सुकून का पर्याय है। मध्य प्रदेश के झील, वेटलैंड्स और जंगल गर्मियों में इस सुकून भरे अनुभव को बर्ड वॉचिंग से जीवंत कर रहे हैं। 450 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों के साथ प्रदेश अब देश का उभरता हुआ बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन बन रहा है।

ये सेंट्रल एशियन फ्लायवे पर स्थित है, जिसके कारण हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षी साइबेरिया, सेंट्रल एशिया और यूरोप से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके वेटलैंड्स में ठहरते हैं। गर्मी आते-आते ये प्रवासी पक्षी लौटने लगते हैं, लेकिन उसी समय स्थानीय (रेजिडेंट) पक्षियों की गतिविधियाँ चरम पर होती हैं, जो बर्ड वॉचिंग के लिए एक नया अनुभव देती हैं।

गर्मियों में इंडियन पैराडाइज फ्लायकैचर, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, पाइड किंगफिशर, रिवर टर्न और मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसे आकर्षक पक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं। ये मौसम पक्षियों के घोंसले बनाने, प्रजनन और उनके प्राकृतिक व्यवहार को करीब से देखने का बेहतरीन अवसर माना जाता है।
मध्य प्रदेश में बर्डवॉचिंग सिर्फ पक्षियों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति को करीब से महसूस करने का अनुभव है। Ataavi Bird Foundation जैसी संस्थाएँ बर्ड वॉक और सिटिजन साइंस गतिविधियों के जरिए लोगों को प्रकृति और संरक्षण से जोड़ रही हैं। अगर आप दूरबीन प्रकृति को महसूस करना चाहते हैं तो मध्य प्रदेश झीलों, जंगलों और वेटलैंड्स से पक्षियों की अनगिनत कहानियों से आबाद है।

*भोपाल* : भोज वेटलैंड (अपर लेक), वन विहार, केरवा और कलियासोत — यहाँ बार-हेडेड गूज, इंडियन पैराडाइज फ्लायकैचर, ब्राउन फिश आउल और रिवर टर्न जैसे पक्षी शहर के बीचोंबीच प्रकृति का अद्भुत संसार रचते हैं।

*जबलपुर* : डुमना नेचर पार्क और नर्रई के जंगल रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो, इजिप्शियन वल्चर और इंडियन रोलर जैसे दुर्लभ पक्षियों के लिए स्वर्ग हैं।

*इंदौर* : गुलावट की लोटस वैली और तलावली चांदा में पाइड किंगफिशर, वूली-नेक्ड स्टॉर्क और रेड अवदावत जैसे रंग-बिरंगे पक्षी प्रकृति को जीवंत बना देते हैं।वहीं सिरपुर झील (रामसर साइट) और यशवंत सागर साइबेरिया, रूस, मंगोलिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों का मुख्य केंद्र है।

*नरसिंहगढ़ और खेओनी* : कम भीड़ और घने जंगलों वाले ये अभयारण्य वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-विंग्ड काइट और यूरेशियन हूपो जैसे पक्षियों के लिए खास पहचान रखते हैं।

*सतपुड़ा और पन्ना* : सतपुड़ा की वॉकिंग सफारी और पन्ना की केन नदी के किनारे मालाबार पाइड हॉर्नबिल, इंडियन स्किमर और गिद्धों की दुर्लभ झलक बर्डिंग को अविस्मरणीय बना देती है।

*ग्वालियर:* जीवाजी यूनिवर्सिटी का हरा-भरा परिसर पर्पल सनबर्ड और एशियन पैराडाइज फ्लायकैचर जैसे पक्षियों का सुरक्षित आश्रय है।

Ataavi Bird Foundation और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) मिलकर स्थानीय समुदायों को बर्ड गाइड और नैचुरलिस्ट के रूप में तैयार कर रहे हैं, जिससे संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। अगर आप भी बर्ड वॉक का हिस्सा बनना चाहते है तो MPTB की वेबसाइट और सोशल मीडिया में रेजिस्ट्रेशन की डिटेल्स हैं। इस गर्मी कुछ अलग कीजिए—पहाड़ों की भीड़ से हटकर, पक्षियों के साथ सुकून भरी सुबह बिताइए। मध्य प्रदेश आइए, पंखों के साथ उड़ान भरिए—जहाँ हर चहचहाहट एक कहानी है।

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