कटनी (सत्येन्द्र गौतम)पशुपालन विभाग कटनी में उपसंचालक पद पर की गई हालिया पदस्थापना ने शासन की महिला सशक्तिकरण एवं समान अवसर नीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विभाग प्रमुख द्वारा इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति करते समय विभाग में कार्यरत दो महिला वरिष्ठ अधिकारियों की योग्यता, अनुभव एवं वरिष्ठता की पूर्णतः अनदेखी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग कटनी में वर्तमान में 01 वरिष्ठ पुरुष अधिकारी(सिविल सर्जन)एवं 02 महिला वरिष्ठ अधिकारी(वरिष्ठ पशु चिकित्सा शल्यज्ञ) ऐसे पदस्थ हैं, जो सेवा नियमों के अनुसार उपसंचालक पद हेतु पूर्ण रूप से योग्य हैं। इसके बावजूद इन सभी को दरकिनार कर सबसे नीचे की वरिष्ठता वाले अधिकारी को उपसंचालक बनाया जाना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि यह महिला अधिकारियों के साथ अन्याय का स्पष्ट उदाहरण भी है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब शासन एवं प्रशासन स्तर पर महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाने, निर्णयात्मक पदों पर अवसर देने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की लगातार बात की जा रही है। ऐसे में योग्य महिला अधिकारियों की उपेक्षा करना महिला अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
विभागीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों में इस निर्णय को लेकर गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि यदि महिला अधिकारियों की वरिष्ठता और अनुभव को इसी प्रकार अनदेखा किया जाता रहा, तो इससे न केवल उनका मनोबल टूटेगा, बल्कि शासन की महिला-हितैषी नीतियाँ भी केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएँगी।
संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारी संगठनों ने शासन से मांग की है कि इस पदस्थापना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, महिला वरिष्ठ अधिकारियों को उनका वैधानिक और नैतिक अधिकार दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी निर्णय प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए जो महिलाओं के साथ भेदभाव को बढ़ावा देती हो।